EMI Moratorium Update: SC ने EMI Moratorium देकर ब्याज वसूलने की नीति पर केंद्र को जमकर फटकार लगाई

EMI Moratorium Update: कोरोनकाल में जब लॉकडाउन का ऐलान हुआ था तब एक के बाद एक बड़े से बड़े और छोटे से छोटे उधोगो पर बहुत ही गंभीर असर पड़ा। एक-एक करके लाखो लोगो की नौकरिया जाने लगी। ऐसे में सरकार ने बड़ी राहत का ऐलान किया जिसका नाम EMI Moratorium (EMI Moratorium Update) था। लेकिन अब सर्वोच्च न्यायलय में मोरेटोरियम (EMI Moratorium Update) के दौरान जो एमी है उस पर ब्याज ना लगे ऐसा अपील किया गया है।

EMI Moratorium Update: इसी सन्दर्भ में सर्वोच्च न्यायलय ने EMI बाद में चुकाने की सहूलियत देकर ब्याज वसूलने की नीति पर सरकार को जमकर फटकार लगाई है। देश की सर्वोच्च न्यायलय ने कहा कि सरकार रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की आड़ लेकर अपनी जिम्मेदारियों से नहीं बच सकती है। कोर्ट ने सरकार से कहा, 'आप अपना पूरा ध्यान सिर्फ कारोबार पर नहीं रख सकते, आपको लोगों के दुखों का भी ख्याल रखना होगा।'


EMI Moratorium Update: ब्याज माफ़ करने का अधिकार केंद्र को है, फैसला RBI पर नहीं छोड़ा जा सकता है


इस सन्दर्भ में सर्वोच्च न्यायलय ने आगे कहा कि सरकार को आपदा प्रबंधन कानून के तहत वह अधिकार प्राप्त है जिसका इस्तेमाल कर वह लोगों को टाली हुई लोन EMI पर ब्याज माफ कर सकती है। लॉकडाउन के कारण उपजे भयावह हालात में ब्याज वसूलने या नहीं वसूलने का फैसला आरबीआई पर नहीं छोड़ा जा सकता है।मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर को होगी।


EMI Moratorium Update: हालतानुसार बैंकों ने दी EMI चुकाने से राहत


ध्यान रहे कि रिजर्व बैंक ने लॉकडाउन के कारण रोजगार छिनने से लोन वालों को राहत देने के मकसद से EMI वसूलने में नरमी दिखाई है। रिजर्व बैंक ने सभी बैंकों से कहा है कि वो अपने ग्राहकों को 31 अगस्त तक EMI नहीं भरने का ऑफर दें। हालांकि, इस दौरान ग्राहकों से सामान्य दर से ब्याज वसूलने की भी अनुमति बैंकों को दी गई है।


EMI Moratorium Update: याचिकाकर्ता की मांग है की मोरेटोरियम के दौरान लगा ब्याज माफ हो


RBI की इस नीति के खिलाफ सर्वोच्च न्यायलय में याचिका दाखिल कर लोन मोराटोरियम (Loan Moratorium Period) के दौरान ब्याज माफ किए जाने की मांग रखी गई है। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि भारत सरकार की तरफ से सुनवाई को बार-बार टालने की मांग की जा रही है।


EMI Moratorium Update: RBI के साथ कर रहे हैं काम: केंद्र


सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि केंद्र सरकार लोन लेने वालों को मुश्किलों से राहत देने की दिशा में आरबीआई के साथ मिलकर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का नजरिया आरबीआई से अलग नहीं हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र से एक सप्ताह में ऐफिडेविट फाइल करने का आदेश दिया और कहा कि केंद्र शपथपत्र में लोन मोरेटोरियम के मसले पर अपना स्टैंड क्लियर करे।


EMI Moratorium Update: ब्याज पर ब्याज वसूलने पर स्टैंड क्लियर करे केंद्र


जस्टिस अशोक भूषण ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि आपको अपना पक्ष एकदम साफ रखना चाहिए। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि सरकार ने पूरे देश में लॉकडाउन लागू किया था। जस्टिस भूषण ने कहा कि सरकार को हमें आपदा प्रबंधन अधिनियम पर अपना रुख बताना होगा और यह भी बताना होगा कि क्या ब्याज पर ब्याज का हिसाब किया जाएगा। बेंच के दूसरे जज जस्टिस एम आर शाह ने कहा कि यह केवल व्यवसाय के बारे में सोचने का समय नहीं है।

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