India Vs China Dispute: सीमा पर नहीं बाज आ रहा है चीन, 40 हजार सैनिको की तैनाती की तैयारी

India Vs China Dispute: भारत और चीन (India and China) के बीच लद्दाख बॉर्डर पर बिगड़े हुए हालात अभी पूरी तरह से नहीं सुधरे हैं। जुलाई की शुरुआत में सैनिकों को पीछे हटाने की जिस बात पर सहमति बनी थी, वो कुछ हदतक ही सफल हो पाई है। अभी भी पैंगोंग लेक और हॉट स्प्रिंग ऐसे इलाके हैं, जहां पर दोनों सेनाएं आमने-सामने हैं।

India Vs China Dispute: सीमा पर नहीं बाज आ रहा है चीन, 40 हजार सैनिको की तैनाती की तैयारी

ऐसे में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए भारतीय सेना पूरी तरह से सतर्क है। भारत और चीन (India and China) के बीच सीमा पर स्थिति नियंत्रित करने के लिए हुए बैठकों के कई दौर के बाद इसपर सहमत हुआ चीन असल में अपनी ही बात पर टिका हुआ नहीं दिख रहा है। चीन की हरकतें इसी ओर इशारा कर रही हैं कि वह वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर स्थिति सामान्य करने को तैयार नहीं है। पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में चीनी सेना द्वारा उसके हिस्से के क्षेत्र में करीब 40 हजार सैनिकों की तैनाती तो इसी ओर इशारा कर रही है।


इसके साथ ही चीनी पक्ष पूर्वी लद्दाख में गतिरोध वाले स्थानों पर से सैनिकों की संख्या घटाने के अपने वायदे का सम्मान भी नहीं कर रहा है। जानकारी के अनुसार दोनों देशों के बीच सैन्य और राजनयिक वार्ताओं में जिन शर्तों पर सैनिकों को कम करने की सहमति बनी थी, चीन उनका भी पालन नहीं कर रहा है। बता दें कि चीन सीमा पर सैनिकों की संख्या घटाने के लिए तब राजी हुआ था जब भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने चीनी विदेश मंत्री से बात की थी। 


India Vs China: हथियारबंद सैनिक तैनात कर रहा चीन


सूत्रों के अनुसार, 'चीनी पक्ष की ओर से स्थिति नियंत्रित करने का कोई संकेत नहीं मिल रहा है। उन्होंने भारी हथियारों के साथ अपने करीब 40 हजार सैनिकों को तैनात करना शुरू किया है। इन सैनिकों को एयर डिफेंस सिस्टम और लंबी रेंज वाले ऑर्टिलरी हथियार जैसे हथियारों से लैस किया गया है।' सूत्रों ने कहा कि दोनों देशों के बीच पिछली सैन्य वार्ता के बाद से सैनिकों को कम करने की प्रक्रिया में भी कोई विकास नहीं हुआ है। 

चीनी पक्ष फिंगर 5 एरिया में भी पीछे हटने को और सिरीजाप में अपनी स्थायी जगह वापस जाने के लिए भी तैयार नहीं है।


India Vs China: 'सीमा पर शांति के लिए दोनों का सहयोग जरूरी'


14 और 15 जुलाई को दोनों पक्षों के बीच हुई कॉर्प्स कमांडर स्तर की वार्ता में इस बात पर सहमति जताई गई थी कि दोनों पक्ष सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया पर नजर रखेंगे और अगले कुछ दिनों में इसे लेकर होने वाली कार्रवाई के विकास की पुष्टि करेंगे। एनएसए डोभाल ने चीनी विदेश मंत्री से वार्ता के दौरान यह स्पष्ट किया था कि सीमा पर शांति स्थापित करने के लिए और विवाद समाप्त करने के लिए दोनों पक्षों को पूर्व की स्थिति में जाना पड़ेगा। 


चीन के इस हरकत के बाद यह तो साबित हो गया है की चीन से किसी भी तरीके के बातचीत से बात नहीं बनने वाला है। विवादित सीमा पर भारत अपनी पुरे जोर के साथ भारतीय सेना को तैनात करे और चायनीज सैनिको का मुहतोड़ जवाब दे।

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