IPL 2020 Conspiracy: IPL से नहीं हटेगा Vivo स्पोंसरशिप का टैग, जानिए क्या है बड़ी वजह

IPL 2020 Conspiracy: बीते दिनों में क्रिकेट के फैंस के लिए काफी अच्छी खबर आयी। एक तरफ जहां कोरोना (Corona) ने सबका हाल बेहाल किया हुआ है वही अब क्रिकेट के सबसे पसंदीदा फॉर्मेट IPL को मजूरी मिल गयी है। क्रिकेट (Cricket) के सबसे रोमांचक टूर्नामेंट में से एक कहे जाने वाले IPL इंडियन प्रीमियर लीग के आयोजन का रास्ता भले ही साफ हो गया हो, लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के चीनी स्पोंसर के प्रति अड़ियल रुख के चलते उसके बहिष्कार की मांग जोर पकड़ने लगी है।

IPL 2020 Conspiracy: IPL से नहीं हटेगा Vivo स्पोंसरशिप का टैग, जानिए क्या है बड़ी वजह

कोरोना (Coronavirus) संकट के बीच IPL-2020 सितंबर में होना है। वहीं BCCI ने चीनी कंपनी के साथ करार तोड़ने से इंकार करके क्रिकेट के इस मिनी कुंभ को खतरे में डाल दिया है। विभिन्न संगठनों ने बोर्ड के इस रुख पर नाराजगी जताई है, वहीं सोशल मीडिया पर भी IPL के बहिष्कार की मांग की जा रही है।


आपको बता दे की पुरे भारत में लद्दाख में चीन और भारत के बीच हुए हिंसा के बाद से चीनी उत्पादों के बहिष्कार का अभियान चल रहा है। सरकार ने भी कई चीनी कंपनियों पर करवाई करते हुए चीनी Apps पर बैन लगा दिया है। ऐसे में लोगों को उम्मीद थी कि BCCI देशहित में Vivo मोबाइल से नाता तोड़ लेगी। आपको बता दें कि चीनी कंपनी Vivo IPL की टाइटल स्पॉन्सर है। हालांकि, बोर्ड ने देशहित से ज्यादा पैसों को तवाज्जो दी और अब अपने इसी रुख के चलते उसे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अब सोशल मीडिया पर लोग #boycott IPL के साथ अभियान चला रहे हैं।


कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने इस संबंध में गृहमंत्री अमित शाह के साथ-साथ विदेश मंत्री एस जयशंकर को पत्र लिखा है। जिसमे कन्फेडरेशन का कहना है कि BCCI का Vivo से नाता नहीं तोड़ना दर्शाता है कि उसके लिए पैसा ही सबकुछ है। गौरतलब है कि IPL 19 सितंबर से शुरू हो रहा है। इस साल टूर्नामेंट को यूएई में स्थानांतरित किया गया है और दुबई, अबू धाबी और शारजाह में सभी मैच होंगे।


IPL 2020 Conspiracy:आखिर चीनी कंपनी से नाता तोड़ना इतना मुश्किल क्यों हो रहा है?


आइये अब एक बार आसान भाषा में समझते है आखिर बोर्ड के लिए चीनी कंपनी से नाता तोड़ना इतना मुश्किल क्यों हो रहा है? दरअसल, 2018 के बाद से बोर्ड को मीडिया राइट्स से करीब INR 3,300 करोड़ प्राप्त हुए हैं। वहीं, उसने प्रायोजकों से 700 करोड़ रुपये की कमाई की है। Vivo प्रति वर्ष टाइटल स्पॉन्सरशिप के लिए BCCI को 440 करोड़ का भुगतान करता है। हालांकि, यह सबकुछ BCCI की जेब में नहीं जाता। आईपीएल के राजस्व का आधा हिस्सा आठ फ्रेंचाइजी में वितरित किया जाता है।


इसके बाद बीसीसीआई के पास बतौर आय लगभग दो हज़ार करोड़ रुपये बचते हैं। जायज है ऐसे में उसके लिए Vivo का साथ छोड़ना आसान नहीं है। ऐसा करके उसे सीधे तौर पर 440 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा।


IPL 2020 Conspiracy: क्या 440 करोड़ के नुकसान ही अकेला वजह है वीवो से नाता ना तोड़ने का?


तो इसका जवाब है नहीं बात अकेले 440 करोड़ की ही नहीं है। यदि बोर्ड चीनी कंपनी को खुद से अलग करता है तो उसे कानूनी कार्रवाइयों में भी उलझना पड़ सकता है। क्योंकि 2018 में वीवो ने INR 2,199 करोड़ की बोली लगाकर पांच साल तक आईपीएल की टाइटल स्पॉन्सरशिप का करार हासिल किया है और कथित तौर पर एग्जिट क्लॉज Vivo के पक्ष में है।

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