Nepal-India के साथ border-border खेलता रहा, चीन पीछे से नेपाल का ही ज़मीन हड़प ले गया!

बीते दिन एक बहुत ही अहम खुलासा हुआ जिससे आपको अपने बचपन की एक कहानी याद आ जाएगी जिसमे दो बिल्ली आपस मे एक रोटी के लड़ते है और एक बंदर बीच बचाव मे रोटी खा जाता है| जी हाँ बीते दिन हुए खुलासे मे कुछ ऐसा ही हुआ Nepal-India के साथ सीमा विवाद मे फसा रहा या ये कहिए की चीन ने फसाया रखा, और नेपाल के पीठ पीछे चीन ने नेपाल का 11 इलाक़ा कब्जा लिया|


नेपाली अखबार ने खुलासा किया है कि चीन ने भी तिब्बत सीमा पर स्थित एक नेपाली गांव पर ज़बरदस्ती कब्जा लिया है| इस गांव पर 60 सालों से चीन का कब्जा है और नेपाल की सरकार भी इसका विरोध करने से डरती रही है| अखबार में प्रधानमंत्री केपी ओली पर भी सवाल खड़े किये हैं कि चीन से गांव लेने में वे भारत से जारी सीमा विवाद जैसी तत्परता नहीं दिखा रहा हैं|


चीन ने नेपाल के रुई गुवान नाम के इस गांव को तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र का हिस्सा बताता है| हालांकि नेपाल के अखबार अन्नपूर्णा पोस्ट का दावा है कि ये गांव नेपाल का है और चीन ने इस पर गैरकानूनी तरीके से कब्जा जमाया हुआ है| नेपाल सरकार के आधिकारिक नक्शे में भी यह गांव नेपाल की सीमा के भीतर ही दिखाया गया है, लेकिन यहां से चीन ने नेपाल प्रशासन को भगा दिया है और इसे अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया है| वही नेपाल सरकार की इतनी भी हिम्मत नही हुई की आवाज़ उठा सके| इसी बात पर अब ओली सरकार पर सवालिया निशान लग रहा है|


अख़बार के मुताबिक, चीन ने नेपाली सीमा में स्थित इस गांव में अपने पिलर भी लगा दिए हैं और नेपाली सरकार ने इसके खिलाफ विरोध दर्ज कराना भी ज़रूरी नहीं समझा| इस गोरखा जिले के रेवेन्यू दफ्तर में भी गांववालों से रेवेन्यू वसूले जाने के दस्तावेज मौजूद हैं| रेवेन्यू अधिकारी ठाकुर खानल ने अखबार से बताया कि ग्रामीणों से रेवेन्यू वसूलने के दस्तावेज अभी भी फाइल में सुरक्षित रखे हैं| अन्नपूर्णा पोस्ट के मुताबिक नेपाल यह इलाका कभी भी चीन से जंग के दौरान नहीं हारा और ना ही दोनों देशों के बीच ऐसा कोई विशेष समझौता हुआ था| यह केवल सरकारी लापरवाही का नतीजा है|


सर्वे डिपार्टमेंट ने कहा है कि 11 नदियों के रास्ता बदलने से पहले ही नेपाल 36 हेक्टयर जमीन खो चुका है। ये जमीनें चार जिलों हुमला, रसुआ, सिंधुपालचौक और सनखुवासभा जिले में हैं।


36 हेक्टेयर जमीन पर चीन (China) के कब्जे को लेकर सबसे पहले पिछले साल नेपाल सरकार को रिपोर्ट दी गई थी। लोकल मीडिया में ये खबरें आने के बाद नेपाल में लोग सड़कों पर उतर आए। लेकिन चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की पिछलग्गू माने जानी वाली केपी ओली सरकार ने नक्शा विवाद के जरिए जनता के आक्रोश को भारत की ओर मोड़ने का प्रयास किया है।


नेपाल ने भारतीय (Nepal-India) इलाके कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा को अपने नक्शे में शामिल कर लिया है। हाल ही में इसके लिए संविधान संशोधन किया गया है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह द्वारा लिपुलेख पास तक 80 किलोमीटर के सड़क के उद्घाटन के बाद केपील ओली सरकार ने इस विवाद को तूल देकर अपने खिलाफ आक्रोश को दबाने की कोशिश की है।

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