Petrol-Diesel Price: पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार17वें दिन भी बढ़ा, आम आदमी का हाल बेहाल

कोरोना के साथ-साथ बेरोज़गारी का मार झेल रही आम जनता को महंगाई से जरा भी राहत मिलने की उम्मीद नहीं दिख रही है| ये पहली बार है जब तेल कंपनियों ने रोजाना पेट्रोल- डीजल के दामों में बढ़ोतरी कर रही है|

Petrol-Diesel Price: पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार 17वें दिन भी बढ़ा, आम आदमी का हाल बेहाल

आज एक बार फिर तेल मार्केटिंग कंपनियों ने कीमतों में इजाफा कर दिया है| पेट्रोल की कीमतों में 0.20 रुपये का इजाफा हुआ है जबकि डीजल के दामों में 0.55 रुपये की बढ़ोतरी हुई है|


Petrol-Diesel Price: पिछले 17 दिनों में 8.50 रुपये महंगा हुआ पेट्रोल


जानकारों का कहना है कि तेल मार्केटिंग कंपनियों ने पिछले 17 दिनों में पेट्रोल की कीमतों में लगभग 8.50 रुपये का इजाफा किया है| वहीं डीजल पिछले 17 दिनों में 9.77 रुपये महंगा हुआ है|


Petrol-Diesel Price: बढ़े हुए कीमत क्या है?


दिल्ली में मंगलवार को पेट्रोल की कीमत 79.76 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जो कि सोमवार को 79.56 रुपये प्रति लीटर थी| वहीं डीजल की कीमत सोमवार के 78.85 रुपये के मुकाबले मंगलवार को बढ़कर 79.40 रुपए प्रति लीटर हो गई है| यानी डीजल और पेट्रोल की कीमत में महज 36 पैसे प्रति लीटर का अंतर हो गया है| डीजल की कीमत ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गई है| इसी देश में कभी पेट्रोल और डीजल की कीमत में 10 रुपये लीटर से ज्यादा का अंतर होता था|


Petrol-Diesel Price: सरकार क्या सोच रही है?


असल में सरकारों की लगातार यह सोच रही है कि पेट्रोल और डीजल में कीमत (Petrol-Diesel Price) के अंतर को कम किया जाए| इसकी वजह यह है कि दोनों पर लागत लगभग एकसमान होती है और डीजल सस्ता बेचने के लिए सरकार को सब्सिडी देनी पड़ती है| डीजल पर सब्सिडी देने के पीछे यह कल्याणकारी सोच थी कि इसका इस्तेमाल एग्रीकल्चर, ट्रांसपोर्ट, बिजली जैसे जरूरी सेक्टर में होता है, इसलिए इस पर राहत दी जाए| लेकिन यूपीए सरकार में इस सब्सिडी का बोझ काफी ज्यादा हो गया था| तो मोदी सरकार ने पेट्रोल के मुकाबले डीजल पर ज्यादा टैक्स बढ़ा-बढ़ा कर दोनों की कीमत लगभग बराबर कर दी है|


Petrol-Diesel Price: और असर क्या होगा?


डीजल की कीमत बढ़ाने का सभी इंडस्ट्री से लेकर कृषि तक असर होता है| इससे ट्रांसपोर्ट की लागत बढ़ जाएगी और महंगाई भी बढ़ेगी| तो जनता पर दोहरी मार पड़ेगी| एक तरफ ट्रांसपोर्ट के लिए ज्यादा किराया देना पड़ेगा और महंगे सामान खरीदने पड़ेंगे| इसका ऑटो सेक्टर की बिक्री पर भी काफी गंभीर असर पड़ेगा| ट्रकों के भाड़े और ट्रेनों के माल भाड़े बढ़ते जाएंगे| इससे अनाज-सब्जियों जैसे आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति महंगी हो जाएगी और इनकी कीमतें बढ़ानी पड़ेंगी| इस तरह से महंगाई बढ़ेगी|


Petrol-Diesel Price: सरकार को बस अपना राजस्व बढ़ाना है


अगर तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो इस समय यूपीए सरकार के 2014 के दौर या मोदी सरकार के 2018 के दौर की तुलना में कच्चे तेल का भाव आधे से भी कम है| साल 2018 में ही कच्चा तेल 80 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर था| भारतीय बॉस्केट के लिए कच्चे तेल की लागत इस साल जनवरी के 70 बैरल प्रति डॉलर से अप्रैल में 17 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. लेकिन सरकार द्वारा लगातार पेट्रोल-डीजल पर टैक्स बढ़त की जाती रही| इसकी वजह से डीजल की कीमतें बढ़ती जा रही है और आम आदमी उस बोझ तले दबता जा रहा है| वही भारत सरकार को इससे कोई फ़र्क पड़ता नही दिखाई पड़ रहा है, उन्हे बस अपना राजस्व बढ़ाना है|


गौरतलब है कि जहां एक तरफ पिछले 15 दिनों से कच्चे तेल की कीमत 35-40 डॉलर प्रति बैरल के बीच है, जो की बीते कुछ वर्षो मे सबसे कम है| वहीं दूसरी तरफ देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिली है| सरकार को चाहिए की इस परीक्षा के परिस्थिति मे आम जनता के साथ रहे और बेरोज़गारी का मार झेल रहे लोगो और जनता के लिए अग्रसर होकर कम करे, और इसकी जबावदेही तय करे|

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