Rajasthan Political Crisis: राजस्थान में CM Vs राज्यपाल, सत्र बुलाने पर राज्यपाल की 6 आपत्तियां

Rajsthan Political Crisis: राजस्थान कांग्रेस का राजनीतिक विवाद अब एक नया मोड़ लेता दिख रहा है। अभी तक राजस्थान की राजनीति में अशोक गेहलोत वनाव सचिन पायलट था। लेकिन अब यह रुख बदल कर अशोक गेहलोत वानव राज्यपाल हो गया है। कांग्रेस सरकार की ओर से निशाने पर लिए जाने के बाद राजभवन ने भी सख्त रुख अपना लिया।

Rajasthan Political Crisis: राजस्थान में CM OR राज्यपाल, सत्र बुलाने पर राज्यपाल की 6 आपत्तियां

Rajsthan Political Crisis: राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा, कि संवैधानिक मर्यादा से ऊपर कोई नहीं होता। किसी भी तरह के दबाव की राजनीति नहीं होनी चाहिए। जब सरकार के पास बहुमत है तो सत्र बुलाने की क्या जरूरत है?


सरकार ने 23 जुलाई को रात में बहुत कम समय में नोटिस के साथ सत्र बुलाने की मांग की। कानून के जानकारों से इसकी जांच करवाई गई तो 6 पॉइंट्स में कमियां पाई गईं। इसे लेकर राजभवन ने पूरा नोट जारी किया है।


Rajsthan Political Crisis: सत्र बुलाने पर 6 आपत्तियां


* सत्र किस तारीख से बुलाना है, इसका ना कैबिनेट नोट में जिक्र था, ना ही कैबिनेट ने अनुमोदन किया।


* अल्प सूचना पर सत्र बुलाने का ना तो कोई औचित्य बताया, ना ही एजेंडा। सामान्य प्रक्रिया में सत्र बुलाने के लिए 21 दिन का नोटिस देना जरूरी होता है।


* सरकार को यह भी तय करने के निर्देश दिए हैं कि सभी विधायकों की स्वतंत्रता और उनकी स्वतंत्र आवाजाही भी तय की जाए।


* कुछ विधायकों की सदस्यता का मामला हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में है। इस बारे में भी सरकार को नोटिस लेने के निर्देश दिए हैं। कोरोना को देखते हुए सत्र कैसे बुलाना है, इसकी भी डिटेल देने को कहा है।


* हर काम के लिए संवैधानिक मर्यादा और नियम-प्रावधानों के मुताबिक ही कार्यवाही हो।


* सरकार के पास बहुमत है तो विश्वास मत के लिए सत्र बुलाने का क्या मतलब है?


राजस्थान में कैबिनेट की सलाह के बावजूद राज्यपाल कलराज मिश्र विधानसभा का सत्र नहीं बुला रहे। संविधान के एक्सपर्ट पीडीटी आचारी के मुताबिक कैबिनेट की सिफारिश के बाद राज्यपाल को सत्र बुलाना ही होता है। संविधान के मुताबिक एक बार इनकार के बाद अगर कैबिनेट सत्र बुलाने की दोबारा मांग करती है तो, राज्यपाल को मानना पड़ता है। पिछले 70 वर्षो में पहला ऐसा मामला है राज्यपाल ने कैबिनेट की सलाह नहीं मानकर सत्र बुलाने से इनकार किया है।


Rajsthan Political Crisis: क्या सत्र बुलाने के लिए बाध्य हैं राज्यपाल?


जब हमने इस सवाल का जवाब ढूंढा तो पता चला की संविधान के आर्टिकल-174 में प्रावधान है कि राज्य कैबिनेट की सिफारिश पर राज्यपाल सत्र बुलाते हैं। इसके लिए वे संवैधानिक तौर पर इनकार नहीं कर सकते।


Rajsthan Political Crisis: राजस्थान में क्या विकल्प हैं?


राज्यपाल सिर्फ सुझाव दे सकते हैं कि कोरोना की वजह से सत्र दो-तीन हफ्ते बाद बुलाया जाए। केंद्रीय कैबिनेट संसद सत्र का फैसला ले और राष्ट्रपति इनकार कर दें तो महाभियोग लाया जा सकता है। राज्यपाल के मामले में ऐसी व्यवस्था नहीं है। राज्य सरकार राष्ट्रपति से मदद मांग सकती है।


Rajsthan Political Crisis: राजस्थान में यह स्थिति कैसे खत्म हो सकती है?


अब मामला राजभवन, कोर्ट और विधानसभा तीनों जगह पहुंच चुका है। ऐसे में जिस तरह के हालात बने हैं उससे लग रहा है कि यह विवाद अब लंबा चल सकता है। दूसरी ओर केंद्र में भाजपा की सरकार है। ऐसा पहली बार हो रहा है कि बागी विधायक अयोग्यता के मामले को लेकर कोर्ट पहुंचे हैं।

7 views

Subscribe to Our Newsletter

  • White Facebook Icon

© All Rights reserved for Befikar Postman