Sushant Singh Rajput Case Update: संदीप सिंह ने तोड़ी चुप्पी, इंस्टा पोस्ट से हर आरोप का दिया जवाब

सुशांत सिंह राजपूत केस (Sushant Singh Rajput Case Update) को ढाई माह से अधिक का समय हो चुका है। इस केस में सुशांत की गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती (Rhea Chakraborty) को मुख्य आरोपी बनाया गया है। मीडिया की खबरों में इस केस में सुशांत के दोस्त संदीप सिंह (Sandip singh) के बारे कई तरह की खबरें छपी थीं। संदीप, सुशांत की मौत के बाद उनके घर, पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार सभी में मौजूद रहे।

Sushant Singh Rajput Case Update: दूसरी तरफ मीडिया में यह सवाल उठा क‍ि संदीप, सुशांत के घरवालों से कभी मिले नहीं तो फिर इतनी सहानुभूति क्यों दिखा रहे हैं, या वे कुछ छिपाने की कोश‍िश कर रहे हैं। मीडिया में अपने खिलाफ छप रही खबरों पर पहली बार संदीप सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपना पक्ष रखा है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एंबुलेंस ड्राइवर से और सुशांत की बहन मीतू सिंह से किए गए व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट भी शेयर किए हैं।


पहले इंस्टाग्राम पोस्ट में संदीप ने लिखा है- 'क्षमा करें भाई, मेरी चुप्पी ने मेरी 20 साल से बनाई इमेज और परिवार को टुकड़ों में बांट दिया है। मुझे नहीं पता था कि आज के समय में दोस्ती के लिए प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है। आज मैं अपनी व्यक्तिगत चैट को सार्वजनिक कर रहा हूं, क्योंकि यह अंतिम उपाय है जो हमारे रिश्ते को साबित करता है।'


संदीप सिंह से मीडिया में यह सवाल पूछा गया कि आप पिछले एक साल से सुशांत के संपर्क में नहीं थे लेकिन अचानक आप सुशांत की मौत के दिन सक्रिय कैसे हो गए? इस संदीप ने कहा कि, मैं बिहारी फैमिली से हूं, अगर हम अनजान व्यक्ति की अर्थी भी देखते हैं तो हम उन्हें भी कंधा देते हैं, ये तो मेरा दोस्त था. सुशांत से मेरी दोस्ती साल 2011 से है।


दूसरे पोस्ट संदीप ने लिखा है- '14 जून को जब मैंने तुम्हारे बारे में सुना, मैं अपने आप को रोक नहीं पाया और तुम्हारे घर की ओर दौड़ पड़ा। वहां मीतू दीदी के अलावा किसी को न देखकर शॉक्ड हो गया। मैं आज भी सोच रहा हूं कि वहां उस समय तुम्हारी बहन के साथ कठिन वक्त में खड़ा रहकर मैंने गलती की या मुझे तुम्हारे दोस्तों के आने का वेट करना चाहिए था।'


संदीप ने आगे कहा कि, सुशांत छिछोरे और ड्राइव बनाने में बिजी था। मैं पीएम नरेंद्र मोदी फिल्म बनाने में बिजी था। मैं वहां गया क्योंकि मैं भीड़ का हिस्सा बनने गया था। मुझे लगा था कि कई लोग जो उनके दोस्त होने का दावा करते हैं, वे सब होंगे लेकिन जब मैं वहां पहुंचा तो वहां कोई नहीं था, वहां सिर्फ मीतू दीदी की फैमिली थी। मित्र होने के नाते मैं वहां सक्रिय था, मुझे नहीं पता था कि ऐसे समय में रिहर्सल करके खास अंदाज में अपनी बॉडी लैंग्वेज दिखानी होती है।


मैं एक मित्र की तरह वहां पहुंचा था। इस मामले में तीसरे पोस्ट में संदीप सिंह ने लिखा- 'लोग कह रहे हैं कि तुम्हारा पर‍िवार मुझे नहीं जानता था। हां ये सच है की मैं कभी तुम्हारे पर‍िवार से नहीं मिला, लेक‍िन शहर में शोक मनाती एक अकेली बहन को उसके भाई के अंतिम संस्कार में मदद करना क्या मेरी गलती थी? एंबुलेंस ड्राइवर के बयान के बाद भी उसके साथ हुई मेरी बातचीत पर उठ रहे सवालों को खत्म करने के लिए मैं बस इतना कहना चाहूंगा।'


यह एम्बुलेंस वाले का कर्तव्य था कि वह फोन करके अपने पैसे मांगे। अस्पताल से किसी ने मेरा नंबर उसे दिया होगा तो ड्राइवर ने मुझे फोन करके अपना पैसा मांगा। यह स्पष्ट था कि ऐसे समय मैंने सुशांत की बहन की स्थिति पर विचार करके उन्हें इसके बारे में कुछ नहीं बताया। मैंने दीपक साहू को अपना नंबर दिया, जिन्होंने अपना बिल 14 को नहीं बल्कि 15 या 16 जून को क्लियर किया। वह अपने पैसों के लिए कॉल कर रहा था। हमने कुछ दिनों बाद नकद में उसके पैसों का भुगतान कर दिया।

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