राक्षस था Vikas Dube, दहशत कायम रखने को ग्रामीण के साथ करता था अत्याचार, जरूर पढ़िए पूरी रिपोर्ट

बीते कुछ महीने में उत्तर प्रदेश विकास दुबे (Vikas Dube) के पाप के दुनिया का अंत हो गया। यह मामला तो बहुत पहले शुरू हो गया था लेकिन 8 पुलिसकर्मी के मरने के बाद सरकार ने फुर्ती दिखाई और विकास दुबे (Vikas Dube) को नाटकीय ढंग से दबोच लिया किया और इनकाउंटर में मार गिराया। विकास दुबे (Vikas Dube) के इनकाउंटर में मरते ही एक एक करके विकास दुबे (Vikas Dube) के गुर्गे आत्मसमर्पण करने लगे। ऐसे ही बीते समय में उमाकांत नाम का एक इनामी अपराधी ने पुलिस स्टेशन में बीबी के साथ आत्मसमर्पण किया।

राक्षस था Vikas Dube, दहशत कायम रखने को ग्रामीण के साथ करता था अत्याचार, जरूर पढ़िए पूरी रिपोर्ट

जब उमाकांत से विकास दुबे (Vikas Dube) के बारे में पूछा गया तो उमाकांत ने बताया की विकास दुबे (Vikas Dube) राक्षस था और वो अपनी दहशत कायम रखने को हैवानियत की किसी भी हद को पार करने को तैयार रहता था। एक बार खेतों पर कब्जे को लेकर एक ग्रामीण ने जब विकास दुबे (Vikas Dube) खिलाफ आवाज उठाई तो उसने उसको बीच गांव में पीटा और मुंह में पेशाब कर दी थी। ऐसी क्रूरता और दरिंदगी की वजह से लोग उससे खूब खौफ खाते थे। इसका खुलासा करने के साथ ही उमाकांत ने बताया कि विकास इंसान नहीं राक्षस था। उसके लिए इंसान की जान की कीमत नहीं थी। मजबूरी में लोग उसका साथ देते थे।


लाइसेंसी राइफल से चलाई थीं पुलिसकर्मियों पर गोलियां


उमाकांत ने बताया कि विकास दुबे (Vikas Dube) के कहने पर उसने अपनी लाइसेंसी राइफल से पुलिस कर्मियों पर गालियां दागीं थीं। घटना के बाद विकास दुबे (Vikas Dube) था कि सब लोग अलग-अलग हो जाओ। इसलिए वह (उमाकांत) शहर दर शहर घूमता रहा। जब कोई रास्ता बचने का नहीं दिखा तो थाने में सरेंडर करने की योजना बनाई।


पुलिस आरोपी के धरपकड़ में नाकाम, बदमाश खुद कर रहे है सरेंडर

 

बिकरू कांड के आरोपियों की धरपकड़ में पुलिस काफी हद तक नाकाम रही है। वारदात के बाद दो बदमाशों को मारने और दो महिलाओं समेत पांच लोगों को जेल भेजने के अलावा पुलिस किसी और को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। हालांकि एसटीएफ ने तीन बदमाशों को एनकाउंटर में ढेर करने के साथ अधिकतर गिरफ्तारियां की हैं। उमाकांत ने अपने एक करीबी के जरिये थाने में सरेंडर होने की योजना बनाई और हाजिर हो गया।


वारदात के तुरंत बाद पुलिस ने प्रेम प्रकाश और अतुल दुबे को इनकाउंटर में मार गिराया था। इसके बाद जहान सिंह, श्यामू बाजपेई समेत पांच लोगों गिरफ्तार कर जेल भेजा था। अन्य सभी गिरफ्तारियां एसटीएफ की टीम ने कीं। विकास दुबे समेत तीन को एसटीएफ ने ही मार गिराया था। एक को इटावा पुलिस ने ढेर किया।


अब भी खूंखार बदमाश पुलिस के गिरफ्त से फरार हैं


पुलिस शुरुआती कार्रवाई करने के बाद हर तरह से फेल रही है। पिछले सप्ताह आरोपी गोपाल सैनी भी पुलिस को चकमा दे कोर्ट में सरेंडर कर जेल चला गया था। अब उमाकांत ने थाने में सरेंडर कर दिया। इसका वीडियो भी बनाया गया। अभी भी जिलेदार, शिव तिवारी, हीरू दुबे से जैसे खूंखार बदमाश फरार हैं।

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